रॉकेट क्या है? इसका आविष्कार कब और किसने किया? | Rocket in Hindi

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क्या आप जानते है  हमारे देश के वैज्ञानिक जब अंतरिक्ष में कोई सॅटॅलाइट भेजते है तो किसकी मदद से भेजते है अगर नहीं तो आइये जानते है की अंतरिक्ष में सैटेलाइट भेजने वाला यंत्र Rocket kya hai? (Rocket in Hindi)

रॉकेट क्या है? रॉकेट किस सिद्धांत पर कार्य करता है ?

रॉकेट एक प्रकार का उड़ने वाला वाहन है जो अंतरिक्ष में Satellite भेजने के लिए उपयोग किया जाता है रॉकेट के उड़ने का सिद्धांत न्यूटन के गति के तीसरे नियम क्रिया तथा बराबर और विपरीत  प्रतिक्रिया पर आधारित है। रॉकेट से सम्बंधित इतिहास 13 वी सदी से प्रारंभ होता है। चीन ने रॉकेट का इस्तेमाल पहले अतिशीबाजी के लिए किया इसके बाद इसके  विद्या को तेजी से बढ़ाया और इसका इस्तेमाल अस्त्र बनाने के उपयोग में किया। (रॉकेट क्यों उड़ाया जाता है)

रॉकेट का इतिहास (History of Rocket In Hindi)

मंगोल शासको ने इस तकनिकी को यूरोप और एशिया के कई भागो तक फैलाया। जब अंग्रेजी सेना के खिलाफ युद्ध में  मैसूर  के शासक टीपू सुल्तान के लड़ाकों ने लोहे से बनाये गए रॉकेट को सन 1792 में इस्तेमाल किया तब अंग्रेजी शासको को रॉकेट ताकत का अंदाजा लगा और पता चला की राकेट क्या है (Rocket kya hai) फिर इसकी तकनिकी का पूरे विश्व में प्रचार किया।

अमेरिकी वैज्ञानिक रॉबर्ट गॉडर्ड ने सन 1926  में तरल ईंधन से चलने वाले पहले राकेट को उड़ाया। जर्मनी के भौतिक वैज्ञानिक एवं अभियन्ता हरमन जूलियस ओबेरथ के नेतृत्व में जर्मनी के वैज्ञानिको ने तरल ईंधन से चलने वाले रॉकेट को विकसित किए और जिसका इस्तेमाल द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी ने दूसरे देशो  पर बम  गिराने के लिए किया| सन 1957 में सोवियत संघ ने पहले सॅटॅलाइट को अंतरिक्ष में भेजने के लिए रॉकेट का इस्तेमाल किया। 

सन 1961 में सोवियत संघ के अंतरिक्ष यात्री यूरी गागरिक रॉकेट में सवार होकर अंतरिक्ष में जाने वाले पहले व्यक्ति बने। सन 1969 में अमेरिका ने सैटर्न  V रॉकेट का इस्तेमाल कर नील आर्मस्ट्रांग और बज ऑल्ड्रिन को चाँद पर भेजा।      

Rocket in Hindi? और रॉकेट कैसे बनाया जाता है 

रॉकेट पेलोड और ईंधन इंजन रॉकेट को बहुत भारी बना देते है इसीलिए इसे कई स्टेजेस  बनाया जाता है। जब रॉकेट उड़ने के लिए तैयार होता है तब उसे बहुत ज्यादा थ्रस्ट की जरूरत होती है और नीचे के स्टेजेस को थ्रस्ट पैदा करने के लिया किया जाता है क्योकि इसमें ईंधन होते है। जब रॉकेट ऊपर की ओर उड़ने लगता है तब जिस जिस स्टेज के ईंधन खत्म हो जाते है उसे रॉकेट से अलग कर दिया जाता है जिससे रॉकेट का वजन कम हो जाता है जिससे इसे Accelerate करने में आसानी होती है और इसका वेग बढ़ जाता है।क्योकि अंतरिक्ष में केवल रॉकेट के अंतिम स्टेज पेलोड को ही भेजना होता है जिसमे सॅटॅलाइट रखी  होती है।

  1. First Stage: Solid S-200 Propellant Booster- Rocket के पहले स्टेज जिसमे दो S -200 Solid Motor होते है जो की कोर स्टेज से जुड़े होते है।सॉलिड प्रोपेलेंट फ्यूल ऑक्सीडीज़ेर और बाइंडर का मिश्रण होता है जो दहन कक्ष  में जलाया जाता है और इसकी ऊष्मा वजह से गर्म गैसे बाहर निकलती है जिससे बहुत ज्यादा  थ्रस्ट उत्पन्न होता है और राकेट ऊपर की ओर उड़ता है। 
  2. Second Stage: Liquid Propellant Engine System- Rocket के दूसरे स्टेज जिसमें लिक्विड प्रोपेलेंट सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है जिसे इंजन या थ्रूस्टर भी कहते है।इसमें फ्यूल और ऑक्सीडीज़ेर को अलग अलग टैंक में रखा जाता है और जब थ्रस्ट की जरूरत होती है तब इन्हे टर्बो पंप की मदद से दहन कक्ष में भेज दिया जाता है  जब इसका ईंधन ख़त्म हो जाता है तब इसे भी रॉकेट से अलग कर दिया जाता है। जिससे रॉकेट का वजन कम हो जाता है जिससे रॉकेट का वेग बढ़ जाता है क्योकि हलके राकेट को आसानी से Accelerate किया जा सकता है।
  3. Third stage: Cryogenic Engine- Rocket के तीसरे स्टेज में दो अलग अलग टैंक में बहुत कम तापमान पर  लिक्विड हाइड्रोजन(-253 Deg. Celsius) और लिक्विड ऑक्सीजन (-183 Deg. Celsius) को रखा  जाता है। थ्रस्ट पैदा करने के लिये इन्हे पंप की सहायता से दहन कक्ष में भेजा जाता है और जलाया जाता है। दक्षता के मामले में Cryogenic स्टेज, सॉलिड स्टेज और लिक्विड स्टेज की तुलना में अत्यधिक दक्ष होता है और प्रत्येक ग्राम ईंधन के जलने पर ज्यादा थ्रस्ट उत्पन्न करता है।

रॉकेट अंतरिक्ष में कैसे जाता है ?

राकेट को लांच करते समय जब  इंजन के दहन कक्ष में  ठोस या तरल ईंधन ( तरल हाइड्रोजन) को ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलाया जाता है तो उच्च दाब पर एक गैस (गर्म वायु ) उत्पन्न होता जो रॉकेट की पीछे की ओर एक पतले मुँह से बहुत तीव्र वेग से निकलने की कोशिश करता  है और इससे  जो प्रतिक्रिया उत्पन्न होती वो रॉकेट को बहुत तीव्र वेग तथा समान बल  से ऊपर की ओर भेजती (High Thrust) है। Rocket अंतरिक्ष यानो को वायुमंडल से ऊपर उड़ना होता है इसलिए वे अपना ईंधन और ऑक्सीजन साथ लेकर उड़ते है। 

रॉकेट में अतिरिक्त बूस्टर क्यों लगाते है ? रॉकेट किस सिद्धांत पर कार्य करता है

जब राकेट उड़ने के लिए तैयार होता है तब  गरूत्वाकर्षण नियम के अनुसार  पृथ्वी राकेट को अपनी तरफ खींचती है। तब इन  बूस्टर की  ही सहायता से राकेट को बहुत तेजी से ऊपर जाने में मदद  मिलती है।

रॉकेट में इंसुलेटर क्यों लगाते है? (Why Used Insulator in Rocket)

रॉकेट (What is Rocket) लॉन्च करने के समय के 48 घंटे पहले ही उसे लांच पैड पर रख दिया जाता है जिससे रॉकेट की सभी कमियों की जांच की जा सके और इसकी वजह से वह सीधे सूरज के गर्म प्रकाश किरणों के संपर्क में रहता है कही इन सूर्य किरणों से उत्पन्न होने वाली ऊष्मा से रॉकेट भीतरी कक्ष के भरे ईंधन में पहले ही आग न लग जाये इससे बचने के लिए रॉकेट के ऊपरी परत पर इंसुलेटर का उपयोग करते है।

 हाइपरलूप क्या है? (What is Hyperloop in Hindi)

भारत के पास कितने रॉकेट लांच सिस्टम है? (How Many Rocket Launch System in India)

भारत में दो रॉकेट लांच सिस्टम है PSLV और GSLV 

PSLV क्या है ?

PSLV (Polar Satellite Launch Vehicle) ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान Rocket Launch System है जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (ISRO) ने बनाया है इसका इस्तेमाल अंतरिक्ष की कक्षा में उपग्रह को स्थापित करने के लिए होता है। यह 1750 किग्रा के पेलोड को  600 से 900 किमी की ऊंचाई पर किसी हलके उपग्रह को  उसके लोअर ऑर्बिट में भेज सकता है। इसकी ऊंचाई 44 मीटर तथा व्यास 2.8  मीटर है। इसके ही मदद से चंद्रयान तथा मंगलयान भेजे थे। यह रिमोट सेंसिंग और पृथ्वी के इमेज लेने के काम आती है। इसमें 4 स्टेज इंजन होता है पहला और तीसरा सॉलिड फ्यूल इंजन जबकि दूसरा और चौथा लिक्विड फ्यूल इंजन  होता है। (About rocket in hindi)      

GSLV क्या है ?

GSLV (Geostationary Satellite Launch Vehicle) भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान Rocket Launch System है जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (ISRO) ने बनाया है इसका इस्तेमाल अंतरिक्ष की कक्षा में सैटेलाइट को स्थापित करने के लिए होता है। यह 2500  किग्रा के पेलोड को 3600 किमी की ऊंचाई पर किसी भारी उपग्रह को  उसके higher ऑर्बिट में भेज सकता है। इसमें 3 स्टेज क्रायोजेनिक इंजन का इस्तेमाल होता है।                     

क्या है SATELLITE GSI -81 का कार्य ?

28 मार्च 2021 को भारत की स्पेस एंड रिसर्च आर्गेनाईजेशन (ISRO ) आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से  GSLV -M 10 रॉकेट से GSI 81 Satellite लॉन्च करेगी जो भारत के बॉर्डर क्षेत्र पर वास्तविक समय तस्वीर (Real Time Image) की निगरानी करेगी और साथ ही साथ भारत में होने वाली प्राकृतिक आपदाओं को भी मॉनिटर कर सकती है। 

Conclusion

आपने इस आर्टिकल में जाना की राकेट क्या है? (Rocket kya hota hai), रॉकेट कैसे उड़ता है और कैसे कार्य करता है? रॉकेट में बूस्टर और इंसुलेटर का इस्तेमाल क्यों करते है अगर आपको ये आर्टिकल में दी गयी जानकारी अच्छी लगी हो तो कमेंट बॉक्स में जरूर बताये और इसे आगे शेयर करे