Chandrayaan-2 का उद्देश्य क्या था? चंद्रयान-2 के द्वारा भेजे डाटा

Share

चंद्रयान-2 का डाटा आया भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन केंद्र (ISRO – Indian Space Research Organisation) के पास। 2 वर्ष पहले भारत के इसरो ने मिशन चंद्रयान 2 के अंतर्गत एक अंतरिक्षयान चन्द्रमा के परिक्रमा करने और चन्द्रमा पर लैंडिंग के लिए लैंडर विक्रम भेजा था | इस अभियान को GSLV-MK III लांच वेहिकल की मदद से भेजा गया था पर विक्रम के चन्द्रमा पर लैंडिंग के 2 किमी पहले ही संपर्क टूट गया था पर चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर चन्द्रमा के चारो तरफ परिक्रमा करते रहे और डाटा भारतीय अनुसन्धान केंद्र इसरो को भेजते रहे तो आइये जानते है Chandrayaan-2 मिशन क्या था और उससे मिले डाटा के बारे में। 

Chandrayaan-2 का वैज्ञानिक उद्देश्य क्या था?

इसरो ने चंद्रयान 2 अभियान में कुल 13 पेलोड भेजे थे। 8 पेलोड ऑर्बिटर में, 3 पेलोड लैंडर में और 2 पेलोड रोवर में हर पेलोड के हिस्से में एक महत्वपूर्ण साइंटिफिक प्रयोग को अंजाम देने की जिम्मेदारी थी।

Chandrayaan 2 का उद्देश्य था की इसमें तीन हिस्से थे जिनमे ऑर्बिटर को चंद्र के चारो तरफ चक्कर लगाकर वहां के सतह के घटको, बर्फ की मौजूदगी, वातावरण, खनिजों की जानकारी धरती पर कमांड सेंटर इसरो तक भेजना था और लैंडर विक्रम के लैंडिंग के 4 घंटे बाद प्रज्ञान रोवर को निकलकर चन्द्रमा की सतह का अध्ययन करना था और उस जानकारी को लैंडर विक्रम से साझा करना था जिसके बाद विक्रम इस जानकारी को ऑर्बिटर तक भेजता और ऑर्बिटर उसे कमांड सेंटर। 

Chandrayaan-2 का उपलब्ध डाटा क्या है?

इसरो ने बताया कि चंद्रयान-2 ने चन्द्रमा की 9000 से ज्यादा की परिक्रमा पूरी कर ली है और उसपर (चंद्रयान-2 का) लगे वैज्ञानिक उपकरण ने उत्साहवर्धक डाटा उपलब्ध कराया है। चन्द्रमा की कक्षा में चंद्रयान-2 की परिक्रमा सुरु  दो साल पूरे होने पर इसरो सोमवार से दो दिवसीय चंद्र विज्ञानं कार्यशाला 2021 का आयोजन कर रहा है। अपने उद्घाटन भाषण में इसरो के चेयरमैन के. सिवन ने कहा की चंद्रयान-2 का 8 उपकरण चन्द्रमा की सतह से 100 किमी की ऊंचाई से उसका ऑब्जरवेशन कर रहा है। इसरो के मुताबिक इस मौके पर सिवन चंद्रयान-2 पर लगे उपकरण के डाटा के साथ – साथ डाटा के नतीजे और दस्तावेज जारी किये।

संघटन ने कहा कि इसके वैज्ञानिक डाटा को अकादमियों और संस्थानों द्वारा विश्लेशण के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। ताकि चंद्रयान-2 मिशन में अधिक भागीदारी के जरिये ज्यादा से ज्यादा वैज्ञानिक निष्कर्ष सामने आ सके। सिवन ने कहा की उन्होंने वैज्ञानिक परिदमो की समीक्षा की है और उन्हें बेहद उत्साहजनक पाया है। इसरो में अपेक्स बोर्ड के वर्तमान चेयरमैन और इसरो के पूर्व चेयरमैन एसएस किरण कुमार ने कहा कि चंद्रयान – 2 पर लगे इमेजिंग एवं वैज्ञानिक उपकरण शानदार डाटा उपलब्ध करा रहे है। 

इसे भी पढ़े क्या है रॉकेट और इसका इतिहास? (What is rocket and its history in hindi) 2021

उन्होंने कहा कि ‘चंद्रयान 2’ के उपकरणों में वास्तव में कई नए फीचर जोड़े गए है जिन्होंने चंद्रयान – 1 द्वारा किये गए ऑब्जरवेशन को नयी ऊंचाई प्रदान की है चंद्रयान 2 का प्रोजेक्ट डायरेक्टर वनिथा एम्. ने कहा कि इसकी सभी उप-प्रणालिया ठीक ढंग से काम कर रही है। उम्मीद है कि इससे कई और वर्षो तक अच्छा डाटा मिल सकेगा। बता दे कि इसरो की इस कार्यशाला की उसकी वेबसाइट और फेसबुक पेज पर लाइव स्ट्रीमिंग की जा रही है। 

हम चन्द्रमा की ओर कदम क्यों बढ़ा रहे है चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव तक पहुंचना क्‍यों जरूरी?

चंद्रमा पृथ्‍वी का सबसे नज़दीकी उपग्रह है जिसके माध्यम से अंतरिक्ष में खोज के प्रयास किए जा सकते हैं और इससे सम्बंधित आंकड़े भी एकत्र किए जा सकते हैं। यह अध्ययन अंतरिक्ष मिशन के लिए जरूरी टेक्‍नोलॉजी आज़माने का परीक्षण केन्‍द्र भी होगा। चंद्रयान 2 का खोज के एक नए युग को बढ़ावा देने, अंतरिक्ष के प्रति हमारी समझ बढ़ाने, प्रौद्योगिकी की प्रगति को बढ़ावा देने, वैश्विक तालमेल को आगे बढ़ाने और खोजकर्ताओं तथा वैज्ञानिकों की भावी पीढ़ी को प्रेरित करने में भी सहायक होगा।

चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव विशेष रूप से दिलचस्प है क्योंकि इसकी सतह का बड़ा हिस्सा उत्तरी ध्रुव की तुलना में अधिक छाया में रहता है। इसके चारों ओर स्थायी रूप से छाया में रहने वाले इन क्षेत्रों में पानी होने की संभावना है। चांद के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के ठंडे क्रेटर्स (गड्ढों) में प्रारंभिक सौर प्रणाली के लुप्‍त जीवाश्म रिकॉर्ड मौजूद है।

Chandrayaan-2 का चन्द्रमा पर पहुंचने के फायदे?

चंद्रयान 2 का चन्द्रमा पर पहुंचने के फायद यह है कि चंद्रमा हमें पृथ्वी के क्रमिक विकास और सौर मंडल के पर्यावरण की अविश्वसनीय जानकारियां दे सकता है। वैसे तो कुछ अच्छे मॉडल मौजूद हैं, लेकिन चंद्रमा की उत्पत्ति के बारे में और अधिक स्पष्टीकरण की आवश्यकता है। चंद्रमा की सतह को व्यापक बनाकर इसकी संरचना में बदलाव का अध्ययन करने में मदद मिलेगी। चंद्रमा की उत्पत्ति और विकास के बारे में भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई जा सकेंगी।